बच्चे अलग-अलग माहौल में बड़े होते हैं, जहाँ आनुवंशिक और पर्यावरणीय तत्व उनके व्यक्तित्व को आकार देते और गढ़ते हैं। माता-पिता के रूप में, बच्चे के विकास को प्रभावित करने वाले जोखिम कारकों को समझना मददगार होता है।
बच्चे की विशिष्ट स्थिति को पहचानने से उसे सही सहायता देने और विकास से जुड़ी संभावित चिंताओं व कारकों को पहचानने में भी मदद मिलेगी। आपका बच्चा जिन पहलुओं से गुज़र रहा है, उन्हें बेहतर ढंग से समझने से आप सुधार के लिए उठाए जा सकने वाले क़दमों पर अधिक नियंत्रण रख पाते हैं।

जन्म के समय हाइपोक्सिया
हाइपोक्सिया तब होता है जब शरीर के ऊतकों में ऑक्सीजन का स्तर कम होता है। जन्म के समय हाइपोक्सिया के लक्षणों की गंभीरता इन कारकों पर निर्भर करती है:
- शिशु को कितनी देर तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिली
- ऑक्सीजन का स्तर कितना कम है
- आपके बच्चे को कितनी जल्दी सही उपचार मिलता है
हाइपोक्सिया के लक्षण और चुनौतियाँ बहुत तरह की होती हैं और हर बच्चे में अलग होती हैं, इसलिए सही मदद पाने के लिए गहन आकलन ज़रूरी है। कभी-कभी हाइपोक्सिया आगे चलकर ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार और सेरेब्रल पाल्सी जैसे न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों का रूप ले सकता है।
ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार (ASD)
ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार एक न्यूरोडेवलपमेंटल विकार है, जो इस बात को प्रभावित करता है कि कोई व्यक्ति कैसे:
- संवाद करता है
- दूसरों से मेलजोल करता है
- अपने आसपास की दुनिया को अनुभव करता है
“स्पेक्ट्रम” शब्द इस बात को स्वीकार करता है कि ऑटिज़्म हर व्यक्ति में अलग-अलग रूप में सामने आता है। हर व्यक्ति में सामाजिक संवाद, मेलजोल और व्यवहार की क्षमता अलग-अलग मात्रा में होती है।
ASD के लक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं:
- सामाजिक मेलजोल में कठिनाइयाँ (जैसे, आँख मिलाकर बात करना, सामाजिक संकेतों को समझना)
- बार-बार दोहराए जाने वाले व्यवहार (जैसे, आगे-पीछे झूलना, हाथ फड़फड़ाना)
- मौखिक और गैर-मौखिक संवाद में चुनौतियाँ
- संवेदी संवेदनशीलता, जैसे तेज़ आवाज़ों या कुछ ख़ास बनावटों के प्रति संवेदनशील होना

सेरेब्रल पाल्सी (CP)
बचपन का सबसे आम मोटर विकार, सेरेब्रल पाल्सी, ऐसी स्थितियों को समेटता है जो व्यक्ति की चलने-फिरने और संतुलन व मुद्रा बनाए रखने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। सेरेब्रल पाल्सी के लक्षणों की गंभीरता हर बच्चे में अलग होती है।
इनमें ये शामिल हो सकते हैं:
- विकास के पड़ावों तक पहुँचने में देरी (जैसे, 8 महीने तक बैठ न पाना या 18 महीने तक न चलना)
- बेचैन या झटकेदार हरकतें
- मांसपेशियों में ऐंठन
- कंपकंपी

बच्चों में ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI)
बचपन में दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। कार दुर्घटना, साइकिल से गिरना या खेल में लगी चोट ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) का कारण बन सकती है— यानी सिर पर अचानक लगे आघात या झटके से मस्तिष्क को होने वाली क्षति।
मध्य पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका के क्षेत्रों में, “ज़्यादातर मामलों में दर्ज की गई TBI की गंभीरता हल्की (63.1%) थी, जबकि मध्यम TBI के मामले 10.7% और गंभीर TBI के मामले 20.2% थे।”
कभी-कभी TBI का असर तभी स्पष्ट होता है जब माता-पिता या शिक्षक घर या स्कूल में बच्चे के संज्ञानात्मक और भावनात्मक व्यवहार में बदलाव देखते हैं।
आपके बच्चे को ये अनुभव हो सकते हैं:
- सिरदर्द
- चक्कर आना
- सिर हल्का महसूस होना
- धुंधला दिखाई देना
शिशुओं और छोटे बच्चों को भी सिर में चोट लगती है। ऐसी चोटों को पहचानना ख़ास तौर पर चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि शिशु आपको सीधे नहीं बता सकते कि उन्हें कुछ ठीक नहीं लग रहा।
शिशुओं में कन्कशन के संकेतों में शामिल हैं:
- गूमड़, नील के निशान, ख़ून बहना
- संतुलन और तालमेल में बदलाव
- उल्टी या दौरे पड़ना
दीर्घकालिक प्रभाव:
जब TBI का असर औसत रिकवरी की अवधि (1-2 महीने) से आगे खिंच जाता है, तो इसे पोस्ट-कन्कशन सिंड्रोम (PCS) कहा जाता है।
TBI होने पर मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे इस तरह के लक्षण हो सकते हैं:
- लंबे समय तक रहने वाला सिरदर्द
- व्यक्तित्व में बदलाव
- स्कूल में प्रदर्शन में गिरावट
- याददाश्त में बदलाव
- सीखे हुए मोटर कौशल खो देना
- नींद में गड़बड़ी
बच्चों में दिखने वाले भावनात्मक और व्यवहार संबंधी लक्षणों का अक्सर ग़लत निदान हो जाता है और उन्हें दूसरी स्थितियाँ समझ लिया जाता है।
TBI के कारण व्यवहार में चिंता और अवसाद जैसे बदलाव आ सकते हैं। बच्चा उन गतिविधियों में रुचि खो सकता है जिनका वह पहले आनंद लेता था, अपने साथियों से दूर हो सकता है, या सामान्य से ज़्यादा चिंतित या डरा हुआ महसूस कर सकता है। कुछ लक्षण अटेंशन-डेफ़िसिट / हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार (ASD) से भी मिलते-जुलते हो सकते हैं। ग़लत निदान से उपचार और रिकवरी में देरी हो सकती है।
स्वास्थ्य-सेवा प्रदाताओं को TBI की संभावना पर ज़रूर विचार करना चाहिए, ख़ासकर तब जब पता हो कि बच्चे को हाल ही में सिर में चोट लगी है।
The Brain & Performance Centre का युवा मेडिकल प्रोग्राम

निश्चिंत रहें, ऊपर बताए गए जोखिम कारकों के अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों का सामना कर रहे बच्चों के लिए मदद उपलब्ध है।
नीचे संक्षेप में बताया गया है कि बच्चे के विकास के दो जोखिम कारकों से जुड़ी विशिष्ट स्थितियों में हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT) कैसे मदद कर सकती है:
- सेरेब्रल पाल्सी (CP): CP से प्रभावित 111 बच्चों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि “HBOT ग्रॉस मोटर क्षमता, बोलने की क्षमता, कार्यात्मक कौशल और संज्ञानात्मक क्षमता में सुधार कर सकता है।”
- ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI): पोस्ट-कन्कशन सिंड्रोम से पीड़ित 8-15 वर्ष के बच्चों पर हुए शोध में पाया गया कि “क्रोनिक चरण में पहुँच चुके PPCS से पीड़ित बच्चों में, चोट के वर्षों बाद भी, संज्ञानात्मक और व्यवहारिक क्षमता, PPCS [लगातार बना रहने वाला पोस्ट-कन्कशन सिंड्रोम] के लक्षणों और जीवन की गुणवत्ता, सभी में HBOT से सुधार होता है।”
शोध के बारे में विस्तार से जानें >>
The Brain & Performance Centre का युवा आकलन

आपके बच्चे का विकास चाहे किसी भी स्तर पर हो, सही निदान मिलना बेहद ज़रूरी है, ताकि आपके बच्चे को उसकी विशिष्ट ज़रूरतों के अनुसार मदद मिल सके। बच्चे के विकास से जुड़ी समस्याओं के लिए लक्षित और व्यक्तिगत रणनीति की ज़रूरत होती है।
आप The Brain & Performance Centre के युवा आकलन प्रोग्राम से देखभाल और सलाह भरोसे के साथ ले सकते हैं, क्योंकि यहाँ आपको दुनिया के कुछ अग्रणी चिकित्सा विशेषज्ञ और वैज्ञानिक मिलेंगे, जो जवाब और समाधान खोजने में आपकी मदद कर सकते हैं।
वैज्ञानिक शोध पर आधारित The Brain & Performance Centre की टीम CP, TBI, PCS और स्ट्रोक से जूझ रहे बच्चों के लिए उनके अनुरूप उपचार योजना तैयार करने में विशेषज्ञ रही है।
The Brain & Performance Centre में एक उज्ज्वल भविष्य आपका इंतज़ार कर रहा है
The Brain & Performance Centre में, जो एक DP World कंपनी है, हम युवा आकलन के लिए व्यक्ति के अनुरूप दृष्टिकोण अपनाते हैं, जिसमें आनुवंशिक, न्यूरोलॉजिकल और पर्यावरणीय कारकों की गहराई से जाँच की जाती है। इससे व्यक्तिगत उपचार योजनाएँ बनाना संभव होता है, जिनमें हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT), संज्ञानात्मक प्रशिक्षण, फ़िज़ियोथेरेपी और पोषण संबंधी मार्गदर्शन शामिल होते हैं।
समय रहते हस्तक्षेप, ख़ासकर सेरेब्रल पाल्सी जैसी स्थितियों में, बच्चों के सकारात्मक विकास और उज्ज्वल भविष्य को बढ़ावा देता है।


