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नए अध्ययन से पता चलता है कि HBOT अल्ज़ाइमर रोग के मुख्य कारकों को उलट सकती है और याददाश्त की कमी को रोकने में मदद कर सकती है

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एक अभूतपूर्व नए अध्ययन ने वैज्ञानिकों को उम्र से जुड़ी संज्ञानात्मक गिरावट, ख़ासकर अल्ज़ाइमर रोग और डिमेंशिया के शुरुआती चरणों से जुड़ी गिरावट, को रोकने और उसका इलाज करने के एक क़दम और क़रीब पहुँचा दिया है।

9 सितंबर को ‘एजिंग’ जर्नल में प्रकाशित यह ऐतिहासिक अध्ययन, उम्र से जुड़ी संज्ञानात्मक गिरावट पर चल रहे एक शोध प्रोग्राम का हिस्सा है। तेल अवीव स्थित Sagol स्कूल ऑफ़ न्यूरोसाइंस और तेल अवीव विश्वविद्यालय द्वारा किए गए इस अध्ययन में पहली बार यह साबित हुआ है कि हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT)—एक गैर-औषधीय पद्धति—अल्ज़ाइमर रोग के मुख्य कारकों और शुरुआती लक्षणों को उलटने में प्रभावी है।

HBOT ऑक्सीजन थेरेपी का एक रूप है, जिसमें मरीज़ को दबाव वाले वातावरण में 100% शुद्ध ऑक्सीजन दी जाती है। HBOT का उपयोग दशकों से अन्य स्थितियों, जैसे न भरने वाले इस्कीमिक घावों, के उपचार में होता रहा है, लेकिन पहली बार इसने अल्ज़ाइमर रोग और डिमेंशिया के मुख्य कारकों और शुरुआती लक्षणों को उलटने तथा मस्तिष्क और संज्ञानात्मक समस्याओं के उपचार के एक संभावित तरीक़े के रूप में भी उम्मीद जगाई है।

इस अनोखे प्रोटोकॉल पर आधारित उपचार अब The Brain & Performance Centre में उपलब्ध है।


उम्र बढ़ना और रक्त प्रवाह में कमी

मस्तिष्क एक बेहद जटिल अंग है, जिसमें तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) का एक विशाल नेटवर्क होता है, जो पनपने के लिए ऑक्सीजन पर निर्भर रहता है। उम्र बढ़ने के साथ हमारे मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं की संख्या स्वाभाविक रूप से घटने लगती है। इससे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम हो जाता है, और फलस्वरूप मस्तिष्क को कम ऑक्सीजन मिलती है। रक्त प्रवाह में इस कमी को वैस्कुलर डिसफ़ंक्शन भी कहा जाता है, और एमिलॉइड प्लाक के साथ-साथ यह अल्ज़ाइमर रोग का एक ज्ञात पूर्व-संकेत है।


एमिलॉइड प्लाक क्या है?

एमिलॉइड प्लाक प्रोटीन के कठोर, अघुलनशील गुच्छे होते हैं, जो न्यूरॉन के बीच की जगहों में बनते हैं। ये बीटा एमिलॉइड से बनते हैं—प्रोटीन के सूक्ष्म टुकड़े, जिन्हें शरीर की कुछ कोशिकाएँ बनाती हैं। मस्तिष्क में बीटा एमिलॉइड न्यूरॉन के बीच मौजूद तरल में पाए जाते हैं, और एक स्वस्थ मस्तिष्क आम तौर पर बिना किसी नुकसान के इन्हें बाहर निकाल देता है। लेकिन जैसे दाँतों को नियमित रूप से साफ़ न करने पर उन पर प्लाक जम सकता है, वैसा ही आपके मस्तिष्क में भी हो सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की दीवारों में एमिलॉइड प्लाक बनने की आशंका बढ़ जाती है। एक बार एमिलॉइड प्लाक बन जाए, तो यह मस्तिष्क के न्यूरॉन को नुकसान पहुँचा सकता है, जिसका अंतिम परिणाम न्यूरॉन की मृत्यु होता है। माना जाता है कि ये प्लाक अल्ज़ाइमर रोग के बढ़ने और उससे जुड़ी संज्ञानात्मक गिरावट में योगदान देते हैं।

वर्षों से वैज्ञानिक यह सोचते रहे हैं कि क्या एमिलॉइड प्लाक को घोलना या छोटा करना संभव भी है। यह अभूतपूर्व नया अध्ययन पहली बार साबित करता है कि HBOT का एक अनोखा प्रोटोकॉल एमिलॉइड प्लाक को उलट भी सकता है और उन्हें बनने से रोक भी सकता है।


HBOT एमिलॉइड प्लाक को कैसे उलट सकती है

अध्ययन के शोधकर्ताओं ने एमिलॉइड प्लाक पर HBOT के प्रभाव को समझने के लिए शुरुआत में चूहों पर HBOT का उपयोग किया। अध्ययन के इस पहले भाग में, शोधकर्ताओं ने चूहों के एक ऐसे समूह को HBOT दी जिनके मस्तिष्क में एमिलॉइड प्लाक मौजूद थे। चूहों को चार हफ़्तों तक, हफ़्ते में पाँच दिन, रोज़ 60 मिनट के दो HBOT सत्र दिए गए। शोधकर्ताओं ने पाया कि HBOT ने चूहों के मस्तिष्क में एमिलॉइड का बोझ काफ़ी कम कर दिया: एमिलॉइड प्लाक 30% से अधिक घटे और प्लाक का आकार लगभग 19% छोटा हुआ।

यह भी दिखाया गया कि HBOT नए एमिलॉइड प्लाक बनने से रोकती है, और कंट्रोल ग्रुप की तुलना में चूहों ने संज्ञानात्मक कार्यों में बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे हमें इस बात का प्रमाण मिला कि HBOT ने उनके संज्ञानात्मक कार्यों में सुधार किया।

चूहों पर हुए इस अध्ययन ने नए और आशाजनक प्रमाण दिए कि HBOT का उपयोग अल्ज़ाइमर रोग के उपचार और रोकथाम, दोनों के लिए किया जा सकता है। इसके बाद शोधकर्ताओं ने यही प्रोटोकॉल इंसानों पर आज़माने की कोशिश की।

इंसानों के परीक्षण समूह में लगभग 70 वर्ष की आयु के छह मरीज़ थे, जो सभी हल्की संज्ञानात्मक क्षति (माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट) से पीड़ित थे। तीन महीने की अवधि में रोज़ होने वाले 60 HBOT सत्र लेने के बाद, मरीज़ों के संज्ञानात्मक कार्यों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, जिसमें बेहतर याददाश्त, एकाग्रता और प्रतिक्रिया समय शामिल हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसा HBOT की मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ाने की क्षमता के कारण होता है। जब मस्तिष्क को ज़्यादा रक्त मिलता है, तो उसे ज़्यादा ऑक्सीजन मिलती है। और जब मस्तिष्क को ज़्यादा ऑक्सीजन मिलती है, तो वह अपनी पूरी क्षमता से काम कर सकता है।


आगे के लिए इसका क्या अर्थ है

यह अध्ययन हमें उम्मीद देता है कि HBOT का उपयोग अल्ज़ाइमर रोग की रोकथाम और उपचार के लिए एक व्यवहार्य, दवा-रहित और नॉन-इनवेसिव तरीक़े के रूप में किया जा सकता है, जो हमें याददाश्त की कमी और हल्की संज्ञानात्मक क्षति को रोकने और यहाँ तक कि उसे ठीक करने के एक क़दम और क़रीब ले जाता है।

“वैस्कुलर डिसफ़ंक्शन का उपचार करके हम अल्ज़ाइमर की रोकथाम का रास्ता तैयार कर रहे हैं। यह और स्पष्ट रूप से दिखाने के लिए आगे शोध चल रहा है कि HBOT कैसे संज्ञानात्मक कार्य में सुधार कर सकती है और इस बीमारी के ख़िलाफ़ बेहद ज़रूरी लड़ाई में एक प्रभावशाली साधन बन सकती है,” यह कहना है डॉ. Shai Efrati का, जो इस अध्ययन को करने वाले शोधकर्ताओं में से एक हैं।

The Brain & Performance Centre के अनोखे HBOT उपचार के बारे में, और यह आपके मस्तिष्क के स्वास्थ्य में कैसे मदद कर सकता है, इसकी अधिक जानकारी के लिए कृपया हमसे संपर्क करें।

एजिंग जर्नल में प्रकाशित अध्ययन पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

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